पाठ्यक्रम: GS2/शिक्षा/शासन
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन प्रस्तुत करने संबंधी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इन संशोधनों के माध्यम से प्रश्नपत्र लीक रोकने हेतु बनाए गए इस कानून को अधिक कठोर दंडात्मक प्रावधानों तथा मामलों के समयबद्ध न्यायिक निस्तारण की व्यवस्था से सुदृढ़ किया जाएगा।
परिचय
- प्रस्तावित संशोधनों में परीक्षा में अनियमितताओं एवं धोखाधड़ी की रोकथाम संबंधी कानून के अंतर्गत अधिक कठोर कारावास, उच्च आर्थिक दंड तथा मामलों के शीघ्र निस्तारण हेतु विशेष फास्ट-ट्रैक न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
- दंड संबंधी संशोधन: संगठित परीक्षा धोखाधड़ी में संलिप्त व्यक्तियों के लिए कारावास की अवधि, जो पूर्व में 3 से 5 वर्ष थी, बढ़ाकर 5 से 10 वर्ष कर दी गई है।
- संगठित गिरोहों में शामिल दोषियों पर लगाए जाने वाले अधिकतम आर्थिक दंड को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है।
- फास्ट-ट्रैक न्यायालय: इस कानून के अंतर्गत मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक न्यायालयों की स्थापना को वैधानिक आधार प्रदान किया गया है।
- इन न्यायालयों को जांच पूर्ण करने, मामलों का निस्तारण करने तथा निर्णय सुनाने का कार्य तीन माह की निर्धारित समय-सीमा के अंदर करना अनिवार्य होगा।
- मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में ऐसे फास्ट-ट्रैक न्यायालयों की अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है, जबकि 23 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी एक विशेष न्यायालय की स्थापना की अधिसूचना जारी की।
- संस्थागत पुनर्गठन : शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में महाप्रबंधक स्तर के वरिष्ठ पेशेवरों की नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी किए हैं। इन अधिकारियों का दायित्व परीक्षा केंद्रों के नेटवर्क, संचालन, सूचना सुरक्षा तथा सतर्कता जैसे प्रमुख कार्यों का पर्यवेक्षण करना होगा।
- इसके अतिरिक्त, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के प्रतिभा सेतु पोर्टल के माध्यम से 16 युवा पेशेवरों को NTA की विभिन्न इकाइयों में नियुक्त किया जाएगा।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024
- यह अधिनियम वर्ष 2024 में पारित किया गया था। इसका उद्देश्य UPSC, SSC जैसी भर्ती परीक्षाओं तथा NEET, JEE एवं CUET जैसी प्रवेश परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक एवं अन्य कदाचारों पर प्रभावी रोक लगाना है।
- इस अधिनियम में “अनुचित साधनों” की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित कदाचार सम्मिलित हैं—
- प्रश्नपत्र अथवा उत्तर-कुंजी का लीक करना।
- परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की सहायता करना (जैसे अनधिकृत संचार या उत्तर उपलब्ध कराना)।
- कंप्यूटर नेटवर्क अथवा अन्य डिजिटल संसाधनों से छेड़छाड़ करना।
- किसी अन्य अभ्यर्थी का प्रतिरूपण करना।
- फर्जी परीक्षाओं का आयोजन करना अथवा जाली दस्तावेज जारी करना।
- मेरिट सूची अथवा रैंक से संबंधित अभिलेखों में हेरफेर करना।
- दंड एवं दायित्व
- व्यक्तियों के लिए: अपराध की गंभीरता के अनुसार 3 से 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
- संगठित अपराधों के मामलों में 1 करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
- सेवा प्रदाताओं के लिए: कदाचार में संलिप्त पाए जाने पर 1 करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
- उन्हें 4 वर्ष तक सार्वजनिक परीक्षाओं के आयोजन से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
- संबंधित निदेशकों एवं प्रबंधन को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाएगा।
- संगठित अपराधों के लिए: ऐसे मामलों में 5 से 10 वर्ष तक के कठोर कारावास तथा न्यूनतम 1 करोड़ रुपये के आर्थिक दंड का प्रावधान है।
- दोषी संस्था की संपत्ति को कुर्क एवं राजसात किया जा सकता है।
- व्यक्तियों के लिए: अपराध की गंभीरता के अनुसार 3 से 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
- जांच
- इस अधिनियम के अंतर्गत सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती तथा गैर-समझौतायोग्य होंगे।
- इन अपराधों की जांच उप पुलिस अधीक्षक अथवा सहायक पुलिस आयुक्त से निम्न पद के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी।
- आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार जांच को किसी भी केंद्रीय जांच एजेंसी को हस्तांतरित कर सकती है।
राधाकृष्णन समिति
- NEET-UG 2024 से संबंधित विवाद के उपरांत शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में सुधार हेतु सुझाव प्रस्तुत करना तथा परीक्षाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता एवं निष्पक्षता को सुदृढ़ बनाना था।
परीक्षा सुधारों हेतु समिति की प्रमुख अनुशंसाएँ
- परीक्षाओं का आयोजन:समिति ने अनुशंसा की है कि वर्ष 2025 से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी केवल उच्च शिक्षण संस्थानों की प्रवेश परीक्षाओं का ही आयोजन करे तथा भर्ती परीक्षाओं का संचालन उसके अधिकार क्षेत्र में न रखा जाए।
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का पुनर्गठन: विद्यार्थियों के लिए त्रुटिरहित, सुरक्षित एवं विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशासन, डिजिटल आधारभूत संरचना तथा सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा से संबंधित दस नए पदों के सृजन की अनुशंसा की गई है।
- डिजी-परीक्षा व्यवस्था: डिजी-यात्रा की तर्ज पर परीक्षा प्रक्रिया को पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए आवेदन, परीक्षा तथा प्रवेश के प्रत्येक चरण में अभ्यर्थियों के डिजिटल प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू करने की अनुशंसा की गई है।
- शासी निकाय: समिति ने एक सशक्त, उत्तरदायी एवं जवाबदेह शासी निकाय के गठन की अनुशंसा की है। इसके अधीन निम्नलिखित तीन उप-समितियाँ गठित की जाएँ—
- परीक्षा लेखा-परीक्षण,
- नैतिकता एवं पारदर्शिता,
- नामांकन तथा कार्मिक सेवा-शर्तें।
- इनका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली की प्रभावी निगरानी तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करना होगा।
- समन्वय समितियाँ: समिति ने राज्य एवं जिला स्तर पर स्पष्ट रूप से निर्धारित अधिकारों एवं उत्तरदायित्वों के साथ समन्वय समितियों के गठन की अनुशंसा की है।
- परीक्षा केंद्र: समिति ने देशभर के केंद्रीय विद्यालयों तथा जवाहर नवोदय विद्यालयों को परीक्षा केंद्रों के रूप में उपयोग में लाने की अनुशंसा की है।
- प्रश्नपत्रों का सुरक्षित परिवहन: समिति ने प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन हेतु निम्नलिखित व्यवस्था उपाय सुझाए है—
- सुरक्षित कूरियर सेवाओं का उपयोग किया जाए।
- प्रश्नपत्रों को अधिकृत अधिकारियों द्वारा सीलबंद किया जाए।
- प्रेषण से पूर्व उनकी पुष्टि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा की जाए।
- प्रश्नपत्र रखने वाले पात्रों को सुरक्षित रूप से बंद रखा जाए।
- परिवहन के दौरान उनकी निरंतर निगरानी की जाए।
- परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र सीसीटीवी निगरानी तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पर्यवेक्षण में ही सुपुर्द किए जाएँ।
- ऑनलाइन परीक्षाएँ: समिति की अनुशंसाओं के आधार पर सरकार भविष्य की प्रवेश परीक्षाओं में संगणक-अनुकूलन आधारित परीक्षा प्रणाली लागू करने की योजना बना रही है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के संबंध में
- स्थापना: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की स्थापना वर्ष 2017 में की गई थी।
- स्वरूप: यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित प्रमुख परीक्षाएँ: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी निम्नलिखित प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करती है—
- संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) — अभियांत्रिकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु।
- राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) — चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु।
- सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा — केंद्रीय विश्वविद्यालयों के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु।
- भर्ती परीक्षाओं का आयोजन: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी विभिन्न सरकारी संस्थाओं के लिए भर्ती परीक्षाओं का भी आयोजन करती है। इनमें प्रमुख रूप से—
- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण,
- दिल्ली उच्च न्यायालय,
- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन,
- तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विभिन्न पदों की भर्ती परीक्षाएँ शामिल हैं।
स्रोत: TH
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